महाभारत काल से लेकर पलायन तक का साक्षी है कैराना, अंगराज कर्ण की नगरी
महाभारत काल से लेकर पलायन तक का साक्षी है कैराना, अंगराज कर्ण की नगरी में क्या है सियासी समीकरण; ग्राउंड रिपोर्ट
अंगराज कर्ण की कर्णपुरी कई कारणों से लगातार सुर्खियों में बनी रहती है। कैराना सभी पलायन को लेकर तो राजनीतिक धूप-छांव को लेकर लाइमलाइट में रहता है। कैराना की राजनीतिक विरासत की बात करें तो यहां की धरती से घरानों की दो धाराएं-एक संगीत और दूसरी सियासत। चुनाव की गर्मी को लेकर कैराना में भी तपिश तेज है। दैनिक जागरण की ग्राउंड रिपोर्ट से जानते हैं यहां का सियासी समीकरण...
महाभारत काल से लेकर पलायन तक का साक्षी है कैराना, अंगराज कर्ण की नगरी में क्या है सियासी समीकरण; ग्राउंड रिपोर्ट
अंगराज कर्ण की कर्णपुरी कई कारणों से लगातार सुर्खियों में बनी रहती है। कैराना सभी पलायन को लेकर तो राजनीतिक धूप-छांव को लेकर लाइमलाइट में रहता है। कैराना की राजनीतिक विरासत की बात करें तो यहां की धरती से घरानों की दो धाराएं-एक संगीत और दूसरी सियासत। चुनाव की गर्मी को लेकर कैराना में भी तपिश तेज है। दैनिक जागरण की ग्राउंड रिपोर्ट से जानते हैं यहां का सियासी समीकरण...
महाभारत काल से लेकर पलायन तक का साक्षी है कैराना, अंगराज कर्ण की नगरी में क्या है सियासी समीकरण; ग्राउंड रिपोर्ट
महाभारत काल से लेकर पलायन तक का साक्षी है कैराना, अंगराज कर्ण की नगरी में क्या है सियासी समीकरण
यूं तो कैराना का इतिहास पांच हजार साल पीछे से शुरू होता है। कहते हैं अंगराज कर्ण की बसाई कर्णपुरी ही आज का कैराना है। मराठाओं ने इसे छावनी क्षेत्र बनाया। मराठा काल में वजीर रहे रंगीलाल की दान में दी गई भूमि पर बना माता बाला सुंदरी का मंदिर और सामने सरोवर यहां आज भी है। इसकी कोख में पलायन का मुद्दा भी पला।
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